Friday, 8 June 2018

World Brain Tumour Day 2018: इन 6 लक्षणों को भूल कर भी न करें अनदेखा, हो सकता है Brain Tumour

World Brain Tumour Day 2018: हर साल, 40,000 से 50,000 लोगों को ब्रेन ट्यूमर होता है, जिसमें से 20% बच्चे हैं। आप मानेंगे नहीं कि ब्रेन ट्यूमर के भी 120 से अधिक प्रकार हैं, जिनके विभिन्‍न लक्षण होते हैं। Brain Tumor को उसके शुरुआती लक्षणों से पहचाना जा सकता है। 

नई दिल्‍ली: हर साल 8 जून को दुनियाभर में विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस World Brain Tumor Day मनाया जाता है। ब्रेन ट्यूमर एक खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी का पता चलने तक रोगी की  9 महीने या एक साल के भीतर ही मौत हो जाती है। हर साल, 40,000 से 50,000 लोगों को ब्रेन ट्यूमर होता है, जिसमें से 20% बच्चे हैं। आप मानेंगे नहीं कि ब्रेन ट्यूमर के भी 120 से अधिक प्रकार हैं, और प्रत्‍येक ट्यूमर के विभिन्‍न लक्षण होते हैं जिनसे इन ट्यूमर की पहचान की जाती है। यह कैंसरयुक्‍त और गैर-कैंसरयुक्‍त भी हो सकता है। जब सिर का ट्यूमर बढ़ने लगता है तो खोपड़ी के अंदर दबाव पड़ने लगता है, जिससे जिंदगी को खतरा हो सकता है। Brain Tumor को उसके शुरुआती लक्षणों से पहचाना जा सकता है। आइये जानते हैं इसके 6 लक्षणों के बारे में जिससे हम सभी आज तक अनजान थे। 

ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती लक्षण


1. मुंह में अकड़न आना 

हमारे दिमाग में बहुत सी ऐसी कोशिकाएं होती हैं जो कई अंगों को एक साथ जोड़ती हैं। इसलिए ट्यूमर की कोशिकाएं जिस भी अंगों के आसपास से गुजरती है, वो अंग प्रभावित हो जाता है। ऐसे में यदि यह कोशिकाएं मुंह के पास से गुजरती हैं तो मुंह अकड़ने लगता है और आवाज आना बंद हो जाती है।


2. दौरे पड़ना


ट्यूमर से इंसान में चिड़चिड़ापन आता है। इससे दौरे पड़ने या झटके लगने शुरू हो जाते हैं। जब ब्रेन ट्यूमर मस्‍तिष्‍क में फैलने लगता है तो दिमाग की कोशिकाएं आसपास की कोशिकाओं को प्रभावित करना शुरू कर देती हैं, जिससे दौरे पड़ते हैं।


 3. उल्टी और मितली आना 


ब्रेन ट्यूमर का एक और लक्षण यह है कि इसमें इंसान को सिरदद के साथ उल्‍टियां भी आनी शुरू हो जाती हैं। इसमें कुछ भी खाने-पीने का मन नहीं करता है।


4. सिर में दर्द


सोने के बाद सिर में तेज दर्द होना आम लक्षण है। बहुत से लोग इसे माइग्रेन समझ कर अनदेखा कर देते हैं। सिरदर्द के साथ चक्‍कर आने लगे और आंखों के सामने धुंधला दिखाई देने लगे तो इसे ब्रेन ट्यूमर का लक्षण समझें।


5. वजन बढ़े या कमजोरी महसूस होना 


ब्रेन ट्यूमर के कुछ लक्षणों में चेहरे के कुछ हिससे में कमजोरी आ जाती है। इसके साथ ही अचानक वजन बढ़ने लगता है। 

Thursday, 7 June 2018

डायबिटीज बन सकता है अनियमित पीरियड्स की वजह: शोध


हाल में हुए एक शोध में दावा किया गया है कि जिन महिलाओं को टाइप-2 डायबिटीज की समस्या होती है उनमें अनियमित पीरियड्स का खतरा बढ़ जाता है। ये अध्ययन अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो में किया गया। हालांकि अनियमित पीरियड्स की वजह सिर्फ डायबिटीज ही नहीं होता है इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे प्रेगनेंसी, हार्मोनल असंतुलन, किसी तरह का इंफेक्शन, बीमरियां और दवाओं का अधिक सेवन आदि।


मोटोपे के कारण होता है डायबिटीज और पीसीओएस


जिन महिलाओं का वजह ज्यादा होता है या जो मोटापे से ग्रस्त होती हैं उनमें इस तरह की समस्या ज्यादा पाई जाती है क्योंकि मोटापे के कारण महिलाओं में पीसीओस का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है और पीसीओएस के कारण डायबिटीज और कई तरह की मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। पीसीओएस एक तरह का हार्मोनल डिसआर्डर है जिसमें महिलाओं के ओवरी यानि अंडाशय के किनारों पर छोटी सी गांठ बन जाती है। ये गांठ इंसुलिन को बनने से रोकती है और इंसुलिन की कमी ही टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनता है। इसके अलावा इस गांठ की वजह से अण्डोत्सर्ग भी ठीक से नहीं हो पाता है और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं।

पीसीओएस की समस्‍या के लक्षण


पीसीओएस के लक्षणों पर अक्‍सर लड़कियों का ध्‍यान नहीं जाता है। चेहरे पर बाल उग आना, अनियमित रूप से माहवारी आना, यौन इच्छा में अचानक कमी, गर्भधारण में मुश्किल होना, आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं। इसके अलावा त्वचा संबंधी रोग जैसे अचानक भूरे रंग के धब्बों का उभरना या बहुत ज्यादा मुंहासे भी हो सकते हैं।
छोटी उम्र में पीसीओएस के कारण


मोटापा


आजकल मोटापे की समस्‍या बहुत ही आम हो गई है। हर दूसरा व्‍यक्ति ज्यादा वसा युक्त भोजन, व्यायाम की कमी और जंक फूड का सेवन करने के कारण मोटापे से ग्रस्‍त है। मोटापे के कारण आज छोटी उम्र की लड़कियों में भी पीसीओएस की समस्‍या पाई जाने लगी है। अत्यधिक चर्बी से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने से ओवरी में सिस्ट बनता है। मोटापा कम करने से इस बीमारी को बहुत हद तक काबू में किया जा सकता है। बीमारी के बावजूद वजन घटाने से ओवरीज में वापस अंडे बनने शुरू हो जाते हैं।

खराब डाइट


जंक फूड शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं इसलिए जंक फूड, अत्यधिक तैलीय, मीठा व फैट युक्त भोजन खाने से बचें। साथ ही डायबिटीज भी इस बीमारी का बड़ा कारण हैं। इसलिए मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। इसके बजाय अपने आहार में हरी-पत्तेदार सब्जियां और फलों को शामिल करें।

लाइफस्‍टाइल


तनाव और चिंता के चलते आजकल की लड़कियां अपने खान पान पर बिल्‍कुल ध्‍यान नहीं देती। साथ ही लेट नाइट पार्टी में ड्रिंक और स्‍मोकिंग लड़कियों की लाइफस्‍टाइल का हिस्‍सा बन गया है। इसलिए पीसीओएस की समस्‍या से बचने के लिए अपनी दिनचर्या को सही करना बहुत जरूरी है। हार्मोंन को संतुलित करके पीसीओएस की समस्‍या को ठीक किया जा सकता है। इसके लिए लड़कियों को सही आहार और नियमित एक्सरसाइज को अपनाना होगा।

Wednesday, 6 June 2018

प्रोस्टेट कैंसर के रोगियों के लिए खुशखबरी


चीनी के वैज्ञानिकों ने प्रोस्टेट कैंसर के लिए जिम्मेदार एक जीन की पहचान की है जिससे इस बीमारी का पता लगाने और उसका इलाज करने में नए तरीके का इस्तेमाल किया जा सकेगा. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने खबर दी है कि सुजहोउ इंस्टि्टयूट ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलोजी के वैज्ञानिकों ने ‘ पीसीएसईएटी ’ नाम के एक नए बायोमार्कर की खोज की है. 

शोध में सामने आया कि प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों में पीसीएसईएटी अधिक मात्रा में है जिससे संकेत मिला कि पीसीएसईएटी संभावित चिकित्सीय लक्ष्य हो सकता है. यह शोध मई में, ‘ बायोकेमिकल एंड बायोफिजिकल रिसर्च कम्यूनिकेशंस ’ में प्रकाशित हुआ है. शोध के आधार पर वे प्रोस्टेट कैंसर का जल्दी पता लगा सकते हैं.  इसके इलाज की लागत में कमी आ सकती है.  

प्रोस्टेट कैंसर से बचाने के लिए तैयार हुआ आरएनए टीका

प्रोस्टेट कैंसर (पौरुष ग्रंथी में होने वाला कैंसर) भारत में होने वाले दस प्रमुख कैंसरों में से एक है. एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर से हर साल भारत में 12,231 लोग जान गंवा देते हैं. आंकड़े बताते हैं कि भारत के सभी क्षेत्र प्रोस्टेट ग्रंथि के कैंसर से प्रभावित हैं. इसके इलाज के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञ कई वर्षों से इसका टीका बनाने की कोशिश कर रहे थे. ब्रिटेन की क्वींस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के विशेषज्ञों का दावा है कि उन्होंने एक ऐसी दवा बना ली है, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाएगी. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने पर प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होगा और प्रतिरक्षा तंत्र कैंसर कारक कोशिकाओं को बनते ही खत्म कर देगा. 


विशेषज्ञों का दावा, प्रोस्टेट कैंसर का भी इलाज

ब्रिटिश विशेषज्ञों का दावा है कि इस दवा से पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर का इलाज भी किया जा सकेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि उनके द्वारा तैयार की गई दवा एक प्रकार का टीका है. इसे कम उम्र में ही पुरुषों को दिया जाएगा, जिससे भविष्य में उन्हें प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा न हो. 



कोशिका तक पहुंचाने के लिए दिया आरएनए टीके का रूप

शोधकर्ताओ का दावा है कि इसे कोशिका तक पहुंचाने का कोई प्रभावी उपाय नहीं मिल रहा था. प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए विशेषज्ञ आरएनए टीका बनाने की कोशिश कर रहे थे. अंत में इसे त्वचा से कोशिका तक पहुंचाने के लिए टीके का रूप दिया. यह टीका शरीर के आनुवांशिकी संदेशवाहक आरएनए का इस्तेमाल करेगा, जिससे  प्रतिरक्षा तंत्र को प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं को पहचानने में मदद मिलेगी. इसका परीक्षण प्रयोगशाला में हो चुका है, अब चूहों पर परीक्षण करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. 


जानें क्या हैं प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण

आमतौर पर प्रारम्भिक अवस्था में प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण दिखाई नही देते हैं. उन्नत अवस्था में कुछ लक्षण उभर कर सामने आते है, जैसे कि पेशाब करने में कठिनाई, बार-बार मूत्र त्याग करने इच्छा, सामान्य से अधिक बार पेशाब करना, हड्डियों में दर्द, मूत्र में रक्त, मूत्राशय या आंत्र नियंत्रण में क्षति, कमजोरी या पैर में सुन्नपन आदि इसके कई मुख्य लक्षण हैं.

Tuesday, 5 June 2018

डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के आसान उपाय


मानसून सीज़न में डेंगू और चिकनगुनिया एक आम समस्या है लेकिन ध्यान न दिया जाए तो यह जानलेवा हो सकती है। क्या हैं इसके लक्षण और कैसे बचें इससे, जानें।
मौसम बदलने के साथ ही लोगों को बुखार और ज़ुकाम के अलावा कई तरह की बीमारियां परेशान करने लगती हैं। इन दिनों चिकनगुनिया और डेंगू होने का खतरा भी बढ़ जाता है और कई बार हम पहचान नहीं पाते हैं कि रोगी को चिकनगुनिया या डेंगू बुखार है या फिर सामान्य बुखार है। ऑनक्वेस्ट लैबोरेट्रीज़, नई दिल्ली के डॉ. रवि गौर बता रहे हैं, चिकनगुनिया, डेंगू और सामान्य बुखार के बीच अंतर, जिससे पता लगाया जा सकता है कि रोगी को कौन-सा बुखार है।




1. चिकनगुनिया और डेंगू बुखार के लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं लेकिन डेंगू चिकनगुनिया की तुलना में ज्य़ादा खतरनाक होता है। चिकनगुनिया की वजह से होने वाला दर्द कुछ महीनों या वर्षों तक बना रह सकता है। चिकनगुनिया 1 से 12 दिन तक रहता है लेकिन इसके लक्षण कई दिनों तक शरीर में मौज़ूद रहते हैं जैसे कि जोड़ों का दर्द। डेंगू 3 से 7 दिन तक रहता है लेकिन डेंगू में कमज़ोरी बहुत ज्य़ादा होती है क्योंकि शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या लगातार गिरती रहती है। सामान्य बुखार में तापमान कुछ समय बाद कंट्रोल हो जाता है।




2. चिकनगुनिया में बुखार, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और आंखों में तकलीफ जैसी समस्याएं होती हैं जबकि डेंगू में त्वचा पर रैशेज़ कम होते हैं और आंखों पर भी कम असर पड़ता है। वहीं सामान्य बुखार में सिर्फ शरीर का तापमान बढ़ता है और खांसी हो सकती है। चिकनगुनिया एक वायरस है, जो मच्छर के काटने से होता है। जैसे ही वायरस शरीर में प्रवेश करता है, वैसे ही बुखार, खांसी, ज़ुकाम के लक्षण पनपने लगते हैं।




3. चिकनगुनिया में हाथ-पैरों के जोड़ों में दर्द होता है और सूजन भी आ जाती है। साथ ही दर्द सुबह के वक्त ज्य़ादा होता है। वहीं डेंगू में कमर की मांसपेशियों में दर्द होता है और कंधे व घुटने में भी दर्द बना रहता है। सामान्य बुखार में ऐसा नहीं होता।



बचाव है ज़रूरी




 शरीर को पूरी तरह ढककर रखें। इस मौसम में फुल स्लीव्स कपड़े पहनें।
 आप चाहें ऑफिस में हो या घर पर, आपका बच्चा पार्क में हो या स्कूल में या आप शॉपिंग कर रही हों या फिर मॉल जैसी सार्वजनिक जगह पर हों, मच्छर-रोधी क्रीम का इस्तेमाल करके ही घर से बाहर निकलें।



 कुछ लोगों को इसके लोशन या क्रीम से चिपचिपाहट महसूस होने लगती है। ऐसे में बाज़ार में मिलने वाले स्प्रे का भी इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे आपका घर रहेगा मच्छर-रहित।



 मार्केट में आजकल रिस्ट बैंड और पैचेज़ भी उपलब्ध हैं। ये उन बच्चों के लिए हैं, जो जेल या क्रीम लगवाने में आनाकानी करते हैं। ये उनके लिए बेहतर विकल्प हैं। पैच को सिर्फ कपड़ों पर लगाना होता है, जिससे मच्छर दूर भाग जाएंगे। 



 जेल एलोवेरा और सिट्रोनेला के गुणों से भरपूर है। इसे यूज़ करने से किसी तरह की स्किन एलर्जी नहीं होती। 

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