Friday, 23 March 2018

5 सुपरफूड जो त्वचा को हेल्दी और सुन्दर बनाते है



आपकी त्वचा को सुन्दर बनाने  के लिए सैकडों ब्यूटी प्रोडक्ट मार्किट में  उपलब्ध हैं लेकिन इनके साइड इफेक्ट ज्यादा  हैं. अगर आप बिना साइड इफेक्ट्स के अपनी त्वचा को हेल्दी और सुन्दर  बना सकते हैं. बस आपको अपने खाने  में थोड़ा बदलाव लाना  पड़ेगा . आज  जानते हैं आपको डायट में क्या- क्या  चीजों को शामिल करना हैं.


स्ट्राबेरी में  विटामिन सी होता है. इसके खाने से  सूरज की रोशनी में त्वचा खराब नहीं होती है . स्ट्राबेरी में मौजूद विटामिन ई से त्व‍चा को ख़राब  होने से बचाते हैं.

अंडे में बायोटीन अच्छी मात्रा होती है. साथ ही इसमें मौजूद विटामिन बी त्वचा के साथ-साथ आँखों और बालों के लिए भी अच्छा होता  है. अंडे में मौजूद सेलेनियम बढ़ती उम्र में त्वचा पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करता है.

गाजर में विटामिन ए होता है और त्वचा के टिश्यू को सही  करने और संतुलित करने के लिए विटामिन ए की आवश्यकता पड़ती है. इससे खाने से  त्व‍चा में रूखापन भी नहीं रहता.

बादाम में  फैटी एसिड और विटामिन ई पाया जाता है जो कि त्वचा को सूरज की रोशनी के कारन त्वचा को  खराब होने से बचाता है

पानी पीने से ना सिर्फ त्वचा पर चमक आती  है बल्कि त्वचा पर पड़ने वाली झुरिर्यों और दाग  की समस्या को भी दूर किया जा सकता है.

Monday, 19 March 2018

हार्ट अटैक से बचाएगा मोबाइल एप


 हार्ट अटैक के आने का पता अब आपको पहले चल जाएगा क्यू की  ये काम करने वाला है एक मोबाइल  एप. शोधकर्ताओं ने एक ऐसा मोबाइल एप विकसित किया है जो हृदयाघात के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार आलिंद फिब्रिलेशन की पहचान कर सकेगा. फिनलैंड में टुर्कू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जुहानी ऐराक्सिनेन ने कहा, “पहली बार सामान्य उपकरण ऐसे नतीजे पर पहुंच पाया है, जिससे वह मरीज के इलाज में सहायता प्रदान कर सके”. शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस एप को कुछ समय तक और विकसित किया जाएगा.

     
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इस वजह से डॉक्‍टर भी पता नहीं लगा पाते थे हार्ट अटैक के आने का पता
हृदय गति का  बहुत तेज गति से धड़कने की क्रिया को आलिंद फिब्रिलेशन कहते हैं, जिससे हृदय का काम बंद करना और हृदय संबंधित  समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में  हार्ट अटैक को रोकने के लिए समय पर इसकी पहचान होना बहुत जरूरी है. रुक-रुक कर आलिंद फिब्रिलेशन होने के कारण वर्षो से डॉक्टरों को भी इसका पता नहीं चलता था, जिस कारण यह खोज और भी ज़रूरी  है.

300 मरीजों पर की रिसर्च
इस शोध के दौरान 300 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें लगभग आधे लोग आलिंद फिब्रिलेशन से पीड़ित थे.शोधकर्ता मोबाइल एप की सहायता से रोग की पहचान करने में कामयाब रहे. शोधकर्ताओं के अनुसार इससे लगभग 96 फीसदी तक सही परिणाम मिले.

कैंसर के मरीजों में खुदकुशी का खतरा 5 गुना ज़्यादा रहता है.

प्रोस्टेट, मूत्राशय और गुर्दा के कैंसर के मरीजों में खुदकुशी करने का खतरा पांच गुना अधिक होता है. भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक सहित अनुसंधानकर्ताओं के एक नए सर्वेक्षण में इस बात माना  गया है. उन्होंने अपने सर्वेक्षण में साथ ही यह दिखाया है कि कैंसर के मरीजों के आत्महत्या करने की आशंका आम लोगों से तीन गुना अधिक होती है. कैंसर का पता चलने और उसके उपचार के दौरान गंभीर मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारण  है. कैंसर के पांच से 25 प्रतिशत मरीज अवसाद के शिकार हो जाते हैं और कई अन्य मरीज पोस्ट- ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर( पीटीएसडी) से प्रभावित हो जाते हैं. 

Thursday, 15 March 2018

डब्ल्यू एच ओ ने 'रोग एक्स' को प्रारंभिक रोगों की सूची में शामिल किया



विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 'रोग एक्स' को  प्रारंभिक वाले रोगों में सूची में शामिल किया है जो आने बाले  भविष्य में घातक वैश्विक महामारी का ख़तरा बन सकता है, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इससे निपटने के लिए अनुसंधान और विकास में तेजी लाने के लिए तत्काल उपाय कि घोषणा कर दी  है.


'रोग एक्स' आर एंड डी ब्लूप्रिंट की 2018 की वार्षिक समीक्षा में सूची में शामिल किया है। डब्ल्यूएचओ द्वारा विकसित सूची में प्रभावी दवाओं या टीकों की कमी वाले रोगों के अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता देने और गति में लाने पर ज़ोर दिया  है।

डब्लूएचओ ने सोमवार को एक बयान में कहा कि 'रोग एक्स' यह तथ्य प्रदर्शित करता है कि एक भी रोग करने बाला  विषाणु या जीवाणु गंभीर अंतर्राष्ट्रीय महामारी का कारण हो सकता है।

इसके अलावा सात अन्य संभावित वैश्विक रोगों की सूची शामिल किया गया है जो सभी प्रभावकारी दवा या टीका की कमी से संबंधित है। इस सूची में क्रिमियन-कॉंगो हीमोरहैजिक फीवर (सीसीएचएफ), इबोला वायरल डिसीस, मारबर्ग वायरस डिसीस, लासा फीवर, मिडल ईस्ट रिस्पायरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस (एमईआरआस-सीओवी) और सवर अक्यूट रिस्पायरेटरी सिंड्रोम (एसएआरआरएस), निपास और हेनीपावायरल डिसीस रिफ्ट वैली फीवर (आरवीएफ) और जीका शामिल हैं।

Wednesday, 14 March 2018

अंडे के इस हिस्से खाने से कैसे बनाए शरीर बलशाली , आज जान लीजिए


कुछ लोग नही जानते है कि अंडे का कौन-सा हिस्सा सेहत के लिए फायदेमंद होता है.

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अंडे का सफेत वाला हिस्सा या फिर पीली  वाला हिस्सा,  ये जानना जरुरी है. बता दें कि जितना प्रोटीन अंडे की जर्दी में होता है उससे बस थोड़ा ही कम प्रोटीन इसके सफेद भाग में पाया जाता है.

प्रति 100 ग्राम में अंडे की पीली जर्दी में करीब 16 ग्राम प्रोटीन होता है. वहीं इसके सफेद भाग में 11 ग्राम प्रोटीन होता है.


 रोज एक अंडा अगर आप खाने मे   में शामिल कर रहे हैं तो आप शरीर में करीब पांच प्रतिशत प्रोटीन की मात्रा को पूरा कर रहे हैं. आपकी सेहत अक्च्ची रखता है.

प्रोटीन की जरूरत हमारे शरीर में सबसे ज्यादा माश  को होती है. इसके सेवन से हमारी मसल्स स्ट्रॉन्ग बनती हैं. प्रोटीन, टिशू को बेहतर कर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है.

अंडे खाने  से आपके सेल्स बेहतर होते हैं और इससे एंजाइम बनते हैं जो हिमोग्लोबिन और मेटाबॉलिज्म को मजबूत करने में मदद करते हैं.

Monday, 12 March 2018

अगर आप कब्ज से परेशान हैं,तो रोज खाएं ये 4 फूड


 अगर आप कब्ज से परेशान हैं, तो अपने भोजन में फलों और सब्जियों को शामिल करें. इनमें बहुत ज्यादा मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो हमारे पाचन तंत्र को सही रखता है. अक्सर यह देखा जाता है कि लोगों का पेट सही नहीं रहता है, फिर भी अपने खाने-पीने की सामग्रियों पर ध्यान नहीं देते. जब तक आपका पेट सही नहीं रहेगा तब तक आप अपना काम भी ठीक से नहीं कर पाएंगे और दिनभर असहज महसूस करेंगे. इसके लिए जरूरी है कि आप अपने भोजन में बीन्स, कद्दू, आलू, चावल और फलों को शामिल करें. आप जो भोजन करते हैं, उसके अलावे मौसमी फल जैसे- संतरा, मौसमी, गाजर, केला, सेब, नाशपाती, अंगूर, तरबूज, चेरी, पपीता, आंवला आदि भी खाएं. इन फलों में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो हमारे पेट की अच्‍छी तरह से सफाई करता है. 

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चावल 

चावल सुपाच्य भोजन होता है और यह हमारे पेट की समस्यायों को दूर करता है. यह हमारे शरीर यूरिक एसिड जैसे विषैसे पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता है. इसलिए, अगर आप चावल खाने के शौकीन हैं, तो यह आपके लिए बहुत अच्छा है, क्योंकि इससे हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम मजबूत बना रहता है.


आलू 

आलू में पाया जाने वाला फाइबर हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम को सही बनाए रखता है, जिससे कब्ज जैसी बीमारी होने का खतरा कम हो जाता है. आप इसे जैसे कई तरह से खा सकते हैं. इसे उबालकर सब्जी के रूप में खा सकते हैं या आप चाहे तो इसके परांठे भी बना कर खा सकते हैं. इसके अलावे भी कई तरह से खा सकते हैं.

कद्दू

कद्दू आसानी से डाइजेस्ट होने वाली सब्जी है और इसमें फाइबर और पानी बहुत ज्यादा होता है, जो कब्ज से लड़ने की क्षमता रखता है. 

हरी बीन्स

कब्ज को ठीक करने में हरी बीन्स को बहुत ही कारगर फूड माना जाता है, क्योंकि यह आपकी आंत को स्वस्थ रखता है और इसे आपके मल को नियमित करने का अच्छा स्रोत भी माना जाता है. बीन्स खाने से हमारे शरीर को प्रोटीन भी मिलता है, क्योंकि बीन्स में प्रोटीन बहुत पाया जाता है.

सिर दर्द से मिलेगी निजात, अपनाएं ये घरेलू उपचार


आज के दौर में लोगों को काम की टेंशन काफी रहती है. इसके अलावा लोगों में थकान भी हो जाती है. इनके कारण अक्सर लोगों को सिर दर्द की समस्या का सामना करना पड़ जाता है. वहीं कई दूसरे कारणों की वजह से भी लोग सिर दर्द के शिकार हो जाते हैं. ऐसे में लोग तरह-तरह की दवाईयों का इस्तेमाल करने लग जाते हैं, जिससे सेहत पर बुरा असर भी पड़ने लग जाता है.

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दवाईयों का इस्तेमाल न करके घरेलू उपचार अपनाकर भी सिर दर्द की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है. तो जान लीजिए सिर दर्द को दूर करने के ऐसे ही कुछ घरेलू उपचारों के बारे में...

सोंठ का पेस्ट

सर्दी में सिर दर्द से परेशान रहने वाले लोगों को सोंठ काफी राहत देने में मददगार साबित हो सकता है. इसके लिए पानी में सोंठ पीसकर माथे पर लगाने से सर्दी से होने वाला सिर का दर्द रुक जाता है.

तुलसी और अदरक

तुलसी और अदरक के इस्तेमाल से भी सिर के दर्द से निजात पाई जा सकती है. इसके लिए तुलसी की पत्तियों का और अदरक का रस एक साथ मिलाएं. इसके बाद इसे माथे पर लगाएं. वहीं इस रस को सिर दर्द से परेशान व्यक्ति को पिलाया भी जा सकता है. इससे सिर दर्द में काफी राहत मिलेगी.



लौंग के तेल से मालिश

लौंग के इस्तेमाल से भी सिर दर्द को दूर किया जा सकता है. लौंग में दर्द खत्म करने के गुण होते हैं. लौंग को गर्म करके किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से सिर दर्द में बहुत राहत मिलती है. इसके अलावा लौंग के तेल से अपने माथे की मालिश करने से भी दर्द से निजात पाई जा सकती है.


नींबू और चाय

चाय में नींबू मिलाने से भी सिर दर्द से राहत पाई जा सकती है. इसके लिए नींबू को चाय में निचोड़कर पीना चाहिए.

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Friday, 9 March 2018

अब खराब नहीं होगा लीवर, यदि खाएंगे ये 6 फूड्स


 मनुष्य का लीवर स्वस्थ रहने से कब्ज, ऐंठन, सूजन और एसिडिटी की समस्या नहीं होती हैं। लीवर ब्लड शुगर के स्तर को रेगुलेट करता है और थकान से बचाता है। लीवर प्रोटीन उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और पित्त में विटामिन, मिनरल और कार्बोहाइड्रेट को स्टोर भी करता है। ऐसे में कुछ फूड्स हैं जिससे रेगुलर खाने से आपका लीवर स्वस्थय बना रहेगा।
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पत्तेदार और हरी सब्जियां 
ब्रोकली, पत्तागोभी आदि पत्तेदार सब्जियां हैं। इन सब्जियों में उच्च मात्रा में फ्लेवनॉयड और कैरोटीनॉयड जैसे फाइटोन्यूट्रिएंट पाये जाते हैं जो लीवर को सही तरीके से कार्य करने में मदद करता है। ये सब्जियां पेट को कैंसर रोगों से बचाती हैं।वहीं, गहरे रंग की हरी सब्जियां हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और ब्रुसेल स्प्राउट में उच्च मात्रा में सल्फर पाया जाता है जो लीवर से टॉक्सिक पदार्थों को निकालता है।

अंकुरित बीज और बेरी
अंकुरित बीज जैसे चना या अखरोट आदि खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। इसमें प्रोटीन और एंजाइम की मात्रा ज्यादा होती है और यह शरीर की क्रियाओं को बढ़ाने का काम भी करता है। अंकुरित बीज खाने से लीवर का संक्रमण भी दूर हो जाता है।वहीं,  बेरी में एंटीऑक्सीडेंट और एंथोसाइनिन होता है। बेरी का जूस लीवर को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है और उसे स्वस्थ रखता है। हफ्ते में तीन बार बेरी खाने से लीवर के संक्रमण से बचाव होता है।

ऑलिव ऑयल और फैटी फिश
फैटी फिश मैकेरल और सालमन जैसी फैटी मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो लीवर के सूजन को कम करता है। यह लीवर में वसा जमने से रोकता है और एंजाइम के स्तर को नॉर्मल रखता है और इंसुलिन को भी सुधारता है। ऑलिव ऑयल लीवर और हार्ट को स्वस्थ रखने में फायदेमंद होता है। एक चम्मच ऑलिव ऑयल का नियमित सेवन करने से लीवर में ब्लड का फ्लो भी ठीक रहता है।

सर्वाइकल कैंसर से हर साल 74 हजार महिलाओं की मौत


भारत में सर्वाइकल कैंसर से हर साल 74 हजार महिलाओं की मौत के मद्देनजर महिलाओं को इस खतरे से जागरूक करने के लिए प्रिवेंटिव हेल्थकेयर एक्सपर्ट और इंडस हेल्थ प्लस प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक कंचन नायकवाड़ी ने कुछ उपाय सुझाए हैं। विश्व भर में सर्वाइकल कैंसर की वजह से होने वाली मौतों में से एक तिहाई भारत में होती हैं।
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महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता देरी से चलने के कारण यह उनकी मृत्यु का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। इस बीमारी से सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी तरीका है, समय पर इसकी जांच करवाना। हालांकि, इसके बारे में जानकारी का अभाव रुकावट पैदा करता है।

सर्वाइकल कैंसर के कारण गिनाते हुए कंचन नायकवाड़ी ने कहा, “वह कैंसर जो सर्विक्स की लाइनिंग को प्रभावित करता है, उसे सर्वाइकल कैंसर कहा जाता है। शहरी लोगों की तुलना में यह बीमारी ग्रामीणों में ज्यादा होती है। सर्वाइकल कैंसर का सबसे प्रमुख कारण इंसानी पेपिलोमा वायरस या एचपीवी होता है। एचपीवी वायरस के संवाहक के साथ यौन संपर्क में आने से एचपीवी फैलता है।”

लक्षणों का जिक्र करते हुए कंचन ने कहा, “योनी से असामान्य रक्तस्राव, सेक्स या फिर टेंपोन इंसर्ट करने के दौरान रक्तस्राव होना, यौन संबंध बनाने के दौरान दर्द महसूस होना, योनी से रक्तमिश्रित अनियिमित डिसचार्ज, मासिकधर्म के बीच में योनी से रक्तस्राव, कमर, पैर या पेडू में दर्द महसूस होना, थकान, वजन में कमी, भूख ना लगना इसके प्रमुख लक्षण हैं।”

कैंसर मुक्त रहने के लिए हेल्थकेयर एक्सपर्ट ने कहा, “स्त्रीरोग विशेषज्ञ के पास नियमित जांच करवायें, हर तीन साल पर पैप स्मीयर टेस्ट करायें, एचपीवी वायरस से बचाव के लिए लगाए जाने वाले टीकों के बारे में अपने फिजिशियन से बात करें, धू्म्रपान छोड़ दें, अपनी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सेहतमंद खाना खाएं और व्यायाम करें।”

उन्होंने कहा कि अगर कैंसर की पहचान समय रहते कर ली जाए तो इससे बचाव और इलाज दोनों संभव है। इसके बारे में जानकारी हासिल करें और साथ ही अपने आस-पास की महिलाओं को भी इस जानलेवा बीमारी से अवगत कराएं।

किचन में छिपा हुआ है हार्ट अटैक का रामबाण उपचार


हार्ट अटैक आज के समय में आम समस्या बन गई है. जब दिल तक खून पहुंचने में दिक्कत होती है तो दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक की आशंका होती है. दिल की बीमारी का इलाज समय से कराना चाहिए नहीं तो यह जानलेवा साबित हो सकती है. दिल की बिमारियों का इलाज महंगा होता है इसलिए आम आदमी इसका खर्चा उठाने में सक्षम नहीं होता है. इलाज के लिए पैसे नहीं होने पर यह और भी जानलेवा होना लाजमी है. हार्ट अटैक के लिए आयुर्वेदिक उपाय मौजूद हैं जिससे इसका इलाज संभव है.

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हार्ट अटैक के लक्षण

हार्ट अटैक आने से पहले कुछ लक्षण सामान्य होतें हैं जिनसे हार्ट अटैक की संभावनाओं का पता चल जाता है. ऐसे समय में सांस फूलना आम बात हैं. ऐसे में ज्यादा पसीना, सीने में दर्द और जलन, उल्टी आना, सिल चकराना, घबराहट होना और पेट में दर्द होना महसूस होता है.


आयुर्वेद से दिल का इलाज

आयुर्वेद की मदद से बिना एंजियोप्लास्टी के करीब 80 फीसदी हार्ट अटैक की संभावना को टाला जा सकता है. इससे दिल की दूसरी बीमारियां भी कम हो जाती है. दिल में खून सही मात्रा में नहीं पहुंचना हार्ट अटैक की संभावना को बढ़ा देता है ऐसे में हार्ट ब्लॉकेज को खोलने के लिए चिकनाई से पैदा होने वाले एसिड को खत्म किया जाता है. दिल की बीमारियां भी इससे खत्म हो जाती हैं. दिल की बीमारियां एसिडिटी के कारण होती है पेट में जब एसिडिटी अधिक हो जाती है तो एसिड खून में मिल जाता है और रक्त वाहिनियों में एसिड ब्लड आगे नहीं बह पाता और ब्लॉकेज की समस्या उत्पन्न होती है.

लौकी है फायदेमंद

हार्ट अटैक का आयुर्वेदिक इलाज करने के लिए ब्लड एसिडिटी को क्षारिय वस्तुएं खाने की सलाह दी जाती है. इसे खाने से ब्लड में अम्लता घट जाती है और ब्लॉकेज खुल जाता है. ऐसे में लौकी की सब्जी और लौकी का जूस फायदेमंद है, जो रक्त की अम्लता कम करती है.

लौकी के रस में तुलसी और पुदीना मिलाएं

लौकी की जूस में तुलसी की पत्ते को मिला कर पिया जा सकता है. तुलसी की पत्ती में क्षारीय गुण होते हैं इसके अलावा पुदीना भी मिला कर पीने पर लाभ मिलता है. इसके स्वाद को बदलने के लिए आप सेंधा नमक मिला सकते हैं इससे कोई हानी नहीं होगी.

मौसम बदल रहा है, अगर दिखे ये लक्षण तो ना करें नजरअंदाज


जब भी मौसम चेंज होता है, तो ज्यादातर लोग बीमार होने लगते हैं. ऐसे मौसम में मन आलस से भर जाता है और शरीर थका-थका रहने लगता है. ऐसे में वायरल फीवर होने का चांस बढ़ जाता है, क्योंकि इस मौसम में वायरल फीवर के वायरस एक्टिव हो जाते हैं और गले पर असर डालना शुरू कर देते हैं. जिन लोगों को वायरल फीवर हो जाता है, उन्हें बहुत ही सावधानी से रहना चाहिए, क्योंकि दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमण हो सकता है. यह फीवर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत ही आसानी से पहुंच जाता है और संक्रमित कर देता है.

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वायरल फीवर के लक्षण

जब कोई व्यक्ति वायरल फीवर से संक्रमित हो जाता है, तो उसे थकान महसूस होने लगती है, शरीर में दर्द होने लगता है. इस तरह के लक्षण के दिखते ही तुरंत डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए, क्योंकि सही समय पर इलाज नहीं होने से इसका संक्रमण दूसरे व्यक्ति को भी हो सकता है. सिर दर्द, शरीर दर्द, भूख नहीं लगना, जोड़ों में दर्द होना, आंखें लाल होना, खांसी और जुकाम होना, कमजोरी महसूस होना आदि वायरल फीवर के प्रमुख लक्षण हैं. इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत इलाज कराना चाहिए.

जानें, वायरल फीवर के क्या हैं लक्षण    

कमजोर लोगों को होता है वायरल फीवर

अगर आपके शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, तो वायरल फीवर होने का भी खतरा बना रहता है. अक्सर उन्हीं लोगों को यह फीवर होता है जिनका इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होता है. अगर वायरल फीवर का इलाज तुरंत नहीं करवाया जाता है, तो यह आपके इम्यून सिस्टम को और ज्यादा कमजोर कर देता है, जिससे किसी दूसरी बीमारी के होने का भी डर बना रहता है.

ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए

चेंज हो रहे मौसम में फ्रिज में रखा ठंडा पानी और कोल्ड ड्रिंक पीने से बचना चाहिए. ठंडा पानी पीने से हमारे गले में वायरल फीवर का वायरस एक्टिव हो जाता है और यह हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर करना शुरू कर देता है. 

प्रदूषित हवा से क्यों है डायबिटीज का खतरा!


अमरीका के कैलिफोर्निया में लगभग एक हजार से अधिक लोगों पर किए गए शोध में पाया गया कि प्रदूषित हवा से डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार वायु प्रदूषण से शरीर में इंफ्लेमेशन की मात्रा बढ़ जाती है जो शुगर के स्तर को गड़बड़ाकर डायबिटीज का कारण बनती है। फिलहाल इस संबंध में शोध जारी हैं। जयपुर स्थित एमएमएस अस्पताल के डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश केसवानी के अनुसार वायु प्रदूषण प्रत्यक्ष नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।


रक्तहोता प्रदूषित :चूल्हे, फैक्ट्री, कारखानों और गाडिय़ों आदि से निकलने वाले धुएं में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड आदि कैमिकल्स का समूह सांसनली से होते हुए सबसे पहले फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है।

इनमें बेहद सूक्ष्म कण भी होते हैं जो फेफड़ों के अलावा रक्तवाहिकाओं में प्रवेश करके उन्हें भी प्रभावित करने लगते हैं जिससे शरीर के अन्य अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यह स्थिति शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए एक आसामान्य व तनावयुक्त स्थिति बन जाती है। ऐसे में कार्टिसोल, एड्रीनलिन व नॉर एड्रीनलिन जैसे स्ट्रेस हार्मोंस जरूरत से ज्यादा स्त्रावित होने लगते हैं। इससे ग्लूकोज का मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है व डायबिटीज की शुरुआत होती है।

हाई कोलेस्ट्रॉल सामान्यत: हमारे शरीर को कोलेस्ट्रॉल की सीमित मात्रा मेें जरूरत होती है ताकि यह कोशिकाओं, हार्मोन व पाचकरस का निर्माण कर सके। इसका निर्माण लिवर करता है। लेकिन जब सांस के साथ प्रदूषित वायु अंदर जाती है तो यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा देती है।

इन्हें ज्यादा खतरा जो लोग ज्यादा देर तक प्रदूषित हवा में रहते हैं, उनमें इंसुलिन बनने व कार्य करने की क्षमता कम होने लगती है। इससे रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ती है व कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक हो जाता है। इसके अलावा जिनका वजन अधिक हो, फैमिली हिस्ट्री या तनाव में रहने वाले लोगों को भी डायबिटीज हो सकती है।

ध्यान रखें
व्यायाम, वॉक व जॉगिंग आदि के लिए सुबह का समय चुनें क्योंकि इस दौरान हवा में प्रदूषण की मात्रा कम होती है।

Monday, 5 March 2018

इन वजहों से कम नहीं होती है पेट में जमा चर्बी


जब आप मोटापा कम करने के लिए कोशिश करते है तो एक्‍सरसाइज और डाइट की वजह से कुछ हद तक आपको आपके बॉडी में फर्क दिखना नजर आता है। लेकिन सबकुछ करने के बावजूद भी शरीर के कुछ हिस्‍सों का फैट जाने का नाम नहीं लेते है। कभी आपने सोचा ऐसा क्‍यूं? दरअसल हमारी लाइफस्‍टाइल और खाने की वजह से हमारी बॉडी में जिद्दी फैट बन जाता है। जिस वजह से शरीर से यह फैट नहीं जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसी वजहों के बारे में बता रहे है जिसकी वजह से हमारी शरीर में फैट जमा होता है। इन वजहों पर अगर हम ध्‍यान दें तो लापरवाही को दूर करते हुए हम फैट से बच सकते है।

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डाइट सोडा से 
अगर आप डाइट सोडा के शौकीन है तो आज ही इसे पीना छोड़ा दे इसमें मौजूद कैलोरी और शुगर की मात्रा आपके शरीर में घुलकर फैट बनाता है जिसकी वजह से आपका मोटापा बढ़ता जाता है।

बाहर का खाना छोड़े 
क्‍या आप रोजाना बाहर जंक फूड या चटपटा मसाले वाला खाना खाना पसंद करते है तो यह आपके शरीर के लिए अच्‍छा नहीं है। क्‍योंकि बाहर के खाने में कैलोरी और नमक ज्‍यादा होता है। अगर आपको कुछ स्‍पाइसी खाना है तो कोशिश करें कि आप घर पर ही सैंडविच या कुछ हेल्‍दी बर्गर बनाकर खाएं

सोशल मीडिया एडिक्‍शन भी एक वजह
 क्‍या आप अपना ज्‍यादात्‍तर वक्‍त सोशल मीडिया में गुजारते हैं, तो आपके शरीर में फैट होना ही है। आप अपनी चंद कीमती समय में से ज्‍यादात्‍तर समय सोशल मीडिया में गुजार देते है इसकी जगह आप कुछ एक्‍सरसाइज या रनिंग कर सकते है। दिन भर बैठे बैठे सोशलमीडिया का आदी होना सेहत के लिए भारी पड़ सकता है।

ज्यादा शराब पीना नुकसानदायक 
कई अध्ययनों में पाया गया है कि ज्यादा शराब पीने से पेट के आस-पास चर्बी जमा हो जाती है। ज्यादा शराब पीने से भूख बढ़ जाती है और आप ज्यादा मात्रा में भोजन करते हैं।

देर से भोजन करना छोड़ें 
सोने से ठीक पहले भोजन करने से बचें। भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने की आदत से आपका वजन बढ़ जाता है क्योंकि नींद के दौरान शरीर फैट को पूरी तरह से एनर्जी में तब्दील नहीं कर पाता।

ज्‍यादा मात्रा में प्रोटीन खा रहे हैं?
 प्रोटीन वजन घटाने के लिए सबसे बड़ा हथियार है, लेकिन ज्‍यादा प्रोटीन भी सेहत के लिए अच्‍छा नहीं है। अपने डायटिशियन से पूछे कि आपके बॉडी को कितने प्रोटीन की जरुरत है।

कैनोला ऑयल के 8 बड़े फायदे


कैनोला ऑयल कैनोला के बीजों से प्राप्त किया जाता है। कैनोला का वैज्ञानिक नाम ब्रैसिका नेपस है। कैनोला ऑयल दशकों से स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए लाभकारी माना जाता है और लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। कैनोला ऑयल में अल्फा-लिनोलेइक एसिड और लिनोलेइक एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड है जो स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है।

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1. हृदय को स्वस्थ रखने में 
कैनोला ऑयल हृदय को स्वस्थ रखने के लिए अच्छा माना जाता है। इस ऑयल में कम मात्रा में संतृप्त वसा होता है जो हृदय को स्वस्थ रखता है। इसके अलावा इसमें फैटी एसिड और स्टीरॉल मौजूद होता है जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसमें कोलेक्ट्राल नहीं होता है और कैनोला ऑयल में पाये जाने वाला फाइटोस्टीरॉल भोजन से कोलेस्ट्रॉल को अवशोषित करने और इसका निर्माण करने से रोकता है, जिससे हृदय रोग नहीं होते हैं।

2.सूजन कम करने में 
कैनोला ऑयल शरीर के सूजन को कम करता है। इसके अलावा यह अस्थमा और अर्थराइटिस जैसे रोगों के इलाज में भी उपयोगी है। कैनोला ऑयल जोड़ों को गतिशील बनाता है और दर्द को कम करता है।

3. एनर्जी लेवल बढ़ाने में 
कैनोला ऑयल का सेवन करने से शरीर का मेटाबोलिज्म बेहतर होता है। इसमें कोलेस्ट्रल नहीं होता है और कैनोला ऑयल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट एनर्जी के लेवल को भी बढ़ाता है।

4. कैंसर के जोखिम को कम करने में 
कैनोला ऑयल कैंसर के जोखिम को कम करने में बहुत लाभकारी होता है। इस ऑयल में पाये जाने वाला विटामिन ई शरीर को कैंसर से बचाता है और इस बीमारी के लक्षणों को उत्पन्न होने से रोकता है।

5. ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में 
कैनोला ऑयल ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डायबिटीज से पीड़ित मरीज यदि कैनोला ऑयल का सेवन करें तो इस ऑयल के सेवन से उनके शरीर में ब्लड ग्लूकोज का लेवल कम होता है। कैनोला ऑयल में उच्च मात्रा में मोनोअनसैचुरेटेड वसा पाया जाता है जो ब्लड शुगर एवं इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

6. यादाश्त ठीक रखने में 
कैनोला ऑयल का सेवन करने से सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इस ऑयल में कुछ ऐसे तत्व पाये जाते हैं जो मस्तिष्क को स्वस्थ रखते हैं और उम्र बढ़ने के साथ यादाश्त कमजोर होने की समस्या को भी दूर करते हैं।

7. स्किन को स्वस्थ रखने में 
कैनोला ऑयल का इस्तेमाल त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए भी किया जाता है। कैनोला ऑयल में फैटी एसिड पाया जाता है दो त्वचा को मॉश्चराइज करता है और त्वचा को पोषण भी प्रदान करता है। यह रूखी त्वचा की समस्या को दूर करता है। कैनोला ऑयल का उपयोग त्वचा के दाग-धब्बे, झुर्रियां और त्वचा के इंफेक्शन को दूर करने में किया जाता है। इस ऑयल में विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो त्वचा को जवान बनाए रखता है।

8. बालों को स्वस्थ रखने में 
कैनोला ऑयल सिर की त्वचा और बालों को पोषण प्रदान करता है और रूसी की समस्या को दूर कर देता है। कैनोला ऑयल बालों की जड़ों तक पहुंचता है और यह बालों के रूखेपन को खत्म कर बालों को सुंदर और चमकदार एवं स्वस्थ बनाता है। यह ऑयल बालों को टूटने से बचाता है और बालों को बढ़ने में मदद करता है। अन्य ऑयल की अपेक्षा बालों के लिए कैनोला ऑयल का चुनाव करने से आपको बेहतर परिणाम मिलेगा।

रोज़ सुबह नमक वाला पानी पीने से होते हैं 10 फायदे



आजकल के इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास अपने आप को फिट और स्वस्थ रखने के लिए भी समय नहीं मिलता है। इस वजह से उन्हें कई सारी खतरनाक बीमारियाँ होने की संभावाना बढ़ जाती है। आप को स्वस्थ रखने के लिए आप अपने घर पर उपाय कर सकते हैं। जानिये, नमक के पानी से कैसे करते है, मलाशय की सफाई इसके लिए ज्यादा कुछ करने की जरुरत नहीं है बस आपको रोजाना सुबह पानी में नमक मिलाकर पीना है। ऐसा करने से आप ढेर सारी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बीमारियाँ जैसे डायबिटीज और मोटापे से बच जायेंगे। आपको बता दें कि ऐसा करने से आप केवल डायबिटीज से ही नहीं बल्कि और भी कई सारी खतरनाक बीमारियों से बच जायेंगे।
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1- स्किन संबंधी समस्या को दूर करता है: 
इस पानी को पीने से आपको स्किन संबंधी समस्या जैसे कील मुंहासे, दाग धब्बे आदि से आसानी से छुटकारा मिलता है क्योंकि इस नमक पानी में क्रैमिया होता है जो स्किन में मौजूद समस्याओं से लड़ने का काम करता है और उसमे निखार लाता है।

2- पाचन तंत्र को ठीक रखता है: 
इस साल्टी पानी को पीने से आपके मुंह में मौजूद लार ग्रंथि एक्टिवेट हो जाती है। लार आपके पेट में मौजूद पाचक एंजाइम जो नेचुरल साल्ट, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और प्रोटीन को पचाने का काम करते हैं, उन्हें पचाने में मदद करता है। इसके अलावा आपके पेट में मौजूद लीवर और आंत भी उन एंजाइम को प्रेरित करते हैं जो आपके द्वारा खाए गये फूड्स को पचाने का काम करते हैं।

3- नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल होता है:
 जैसा कि हमने आपको बताया कि इस साल्टी पानी में ढेर सारे मिनरल्स होते हैं जिसकी वजह से यह नमक वाला पानी एक नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल की तरह काम करता है जो आपके शरीर में मौजूद बीमारी फैलाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया को मारने का काम करता है और आपके स्वास्थ्य को ठीक रखता है।

4- हड्डियों को मजबूत बनाता है: 
एक समय के बाद हमारे शरीर में मौजूद मिनरल्स और कैल्शियम ख़त्म होने लगते हैं जिसकी वजह से हड्डियां कमजोर होने लगती है और उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में यह साल्टी पानी हड्डियों में मौजूद इन मिनरल्स की भरपाई कर हड्डियों की मजबूती बनाए रखता है। इसलिए रोजाना आप इस पानी का सेवन करें।

5- मांसपेशियों को मजबूत बनाता है: 
काला नमक को गुनगुने पानी में मिलाकर रोजाना पीने से आपके शरीर में मौजूद पोटैशियम दूर होता है जिसकी वजह से आपकी मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और आप स्वस्थ रहते हैं। इसलिए आपको रोजाना इस पानी का सेवन करना चाहिए।

6- वजन कम करता है:
आपको बता दें कि काले नमक को गुनगुने पानी में मिलाकर रोजाना पीने से आपके शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा फैट कम होता है जिसकी वजह से आपका मोटापा आसानी से दूर होता है। इसके अलावा ऐसा करने से आपके शरीर का कोलेस्ट्राल लेवल कम होता है जिससे डायबिटीज जैसी खतरनाक बीमारी होने की संभावना भी कम हो जाती है। इसलिए आप रोजाना इस नमक वाले पानी का रोजाना सेवन करें।

7. शरीर को डिटॉक्‍स करता है: 
शरीर को अंदर से साफ करने के लिये यह पानी काम में लाया जा सकता है। शरीर से टॉक्‍सिन निकालना बहुत जरुरी है। इससे आपके अंदर के ऑर्गन डैमेज नहीं होते।

8. शरीर को हाइड्रेट करता है :
यह पानी आपको अंदर से हाइड्रेट करने में मदद करेगा। इसका साफ असर आपको आपकी हेल्‍थ पर पड़ता हुआ दिखेगा। इससे स्‍किन की इलास्‍टिसिटी भी बनी रहेगी और आपकी स्‍किन हर पल मुलायम रहेगी।

9. लिवर की समस्‍या से निजात दिलाए:
नमक युक्‍त पानी पीने से खराब हुई या डैमेज हुई लिवर सेल्‍स दुबारा काम करने लगती हैं और वह रिपेयर भी हो जाती हैं। अगर किसी के सिरोसिस कि समस्‍या है तो वह भी ठीक हो जाती है।

10. अच्‍छी नींद लाने में मददगार 
नमक ब्‍लड में कॉर्टिसोल और एड्रनिल को बढाने मे मदद करता है। ये हार्मोन्‍स स्‍ट्रेस से डील करते हैं। इन हार्मोन्‍स को मैनेज करने से नींद अच्‍छी आती है इसलिये अगर आपको नींद की परेशानी है तो रोज सुबह नमक का पानी पिएं।

चाहे जिस तरह की भी खुजली हो, इन 13 नुस्‍खों से तुरंत मिलेगी राहत



क्या आप अपनी स्किन में होने वाले सूखेपन और खुजली से दिक्कत महसूस करते हैं? अगर हाँ तो आपको पता होना चाहिए कि यह कई लोगों की समस्या है। अपनी रूखी और खुजली वाली त्वचा की वजह से आप अपने रोजाना के काम से भी दूर होते हैं। त्वचा में खुजली और सूखापन कई कारणों से होता है उनमे से एलर्जी, कीड़ा काटने , स्किन इन्फेक्शन, ड्राई मौसम, दवाइयां, और कुछ डिटर्जेंट आदि मुख्य हैं।
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यदि आपकी त्वचा में खुजली की समस्या है तो आपको सूजन, लाल निशान पड़ना आदि जैसी दिक्कतें भी होंगी। इससे आपकी त्वचा खराब हो सकती है जो आपके लिए खतरनाक हो सकता है। अपनी त्वचा को ऐसे बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बचाने के लिए आप घरेलू उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं जिन्हें हम आपको इस आर्टिकल में बताने जा रहें हैं।

बेकिंग सोडा: 
बेकिंग सोडा त्वचा की खुजली दूर करने का सबसे आम उपाय है क्योंकि इसमें एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होता है। इसके लिए आपको एक कप बेकिंग सोडा को नहाने के पानी में मिलाकर आधा घंटे के लिए अपने ड्राई स्किन को भिगोना है।

नारियल तेल: 
नारियल तेल सदियों से त्वचा के सूखेपन को दूर करने में इस्तेमाल होता रहा है। ड्राई स्किन पर इस तेल का मसाज करने से आपको तुरंत आराम मिलता है।

ओटमील पाउडर: 
ओटमील पाउडर में एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होने की वजह से यह त्वचा के सूखेपन को दूर करता है। इसके लिए एक कप ओटमील पाउडर को थोड़े से पानी में मिलाकर पेस्ट बनाएं और रोजाना ड्राई स्किन पर लगाएं

तुलसी पत्ता:
 तुलसी पत्ता स्किन के सूखेपन और खुजली को दूर करने में आपकी मदद करता है। इसके लिए 6 तुलसी के पत्तों को पीसकर नारियल तेल में मिलाकर ड्राई स्किन पर लगाएं।

नींबू: 
नींबू में एंटी-सेप्टिक और एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होते हैं जिससे यह त्वचा की खुजली को दूर करता है। इसके लिए आप नीम्बू के रस को प्रभावित जगह पर लगाएं और फिर गुनगुने पानी से धो लें।

नीम का पत्ता: 
नीम के पत्ते में एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होने की वजह से यह स्किन की खुजली और सूखेपन को दूर करता है। इसके लिए आप नीम के पत्ते को पीसकर ड्राई स्किन पर रोजाना लगाएं।


अगर लगती है हर वक्‍त थकान तो आजमाएं ये 13 घरेलू उपचार


क्‍या रात में आठ घंटे की नींद पूरी करने के बाद भी आप दिन भर थकान महसूस करते हैं? अगर इसका जवाब हां है तो इसके कई कारण हो सकते हैं। एक कारण हो सकता है कि शायद आप किसी बीमारी से ग्रस्‍त हैं या फिर दूसरा कि आपके शरीर में किसी पोषण की कमी है। कई लोंगो को पता ही नहीं चल पाता कि उन्‍हें थकान होती है।

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अगर आप भी उनमें से एक हैं तो जान लें कि इसके लक्षण क्‍या है। आपको नींद नहीं आएगी, पेट की समस्‍या बनी रहेगी, शरीर में दर्द रहेगा, ब्‍लड प्रेशर लो रहेगा या फिर सिर दर्द भी हो सकता है। लेकिन एक सही खान पान आपकी इस चिंता को दूर कर सकता है। हांलाकि इसमें थोड़ा समय लगेगा लेकिन अगर आप कुछ तरह के घरेलू उपचार अनाएं तो आपकी थकान हमेशा के लिये दूर हो जाएगी। आइये जानते हैं क्‍या हैं वो घरेलू उपचार जो आपकी थकान और आलस को दूर कर सकते हैं।

दही 
दही में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा काफी अधिक होती है। साथ ही यह पेट भी अच्‍छा रखता है, इसलिये इसे दिन में एक बार खाना ना भूलें।

विटामिन सी वाले फूड 
विटामिन सी में ढेर सारा एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि थकान से लड़ने में मदद करता है। यह विटामिन दिमाग में कॉर्टिसोल का उत्‍पादन करने में मदद करता है। अपनी डाइट में विटामिन सी जैसे ब्रॉक्‍ली, कीवि, अंगूर, संतरे या टमाटर शामिल कीजिये और लाभ लीजिये।

मैगनीशियम वाले आहार
 ऐसे आहार जिसमें मैगनीशियम होता है वह ग्‍लूकोज को एनर्जी में ब्रेकडाउन करने में काफी मदद करता है। अगर आपके शरीर में मैगनीशियम की कमी होगी तो शरीर एक दम थका हुआ रहेगा। इसलिये जरुरी है कि आप अपने आहर में मैगनीशियम वाले आहार खाएं जैसे, मेवे, मछली, बीज, सोयाबीन, एवाकाडो, केला और डार्क चॉकलेट।

बादाम 
यह सबको मालूम है कि बादाम खाने से ताकत आती है। विटामिन ई और मैग्निशियम जैसे मिनरल से भरपूर होने के कारण बादाम कमजोरी से लड़ने में मददगार है।

हर्बल ड्रिंक पिएं
 ग्रीन टी, आंवला सीरप या एलोवेरा जूस पिएं। इन्‍हे पीने से शरीर में एनर्जी बनी रहती है और शरीर को थकान से लड़ने में मदद मिलती है।


Thursday, 1 March 2018

होली के रंगों के बीच स्वास्थ्य को न करें नजरअंदाज, फॉलो करें ये टिप्स


रंगों के खूबसूरत त्योहार होली की तैयारियां जोरों-शोरों से शुरू हो गई हैं। इको-फ्रेंडली (पर्यावरण-अनुकूल) जश्न के इस माहौल में क्या आप सुरक्षित और सेहतमंद होली की तैयारी में जुटे हैं? अगर हां, तो बहुत बढ़िया! होली का मजा तब दुगना हो जाता है जब आपको किसी हानिकारक केमिकल से जुड़ी या स्वास्थ्य संबंधी चिंता नहीं सताती। जी हां, होली के जश्न के साथ कुछ स्वास्थ संबंधी जोखिम भी जुड़े हो सकते हैं। लेकिन सावधानी और बचाव के तरीकों से आप पूरे मन से इस त्योहार का आनंद उठा सकते हैं। हेल्थियंस की वरिष्ठ लाइफस्टाइल मैनेजमेंट कन्सल्टेंट डॉ. स्नेहल सिंह ने होली के जश्न से जुड़े कुछ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और उनसे बचने के सुरक्षात्मक तरीके बताए हैं।

एलर्जी की समस्या

होली के रंग अक्सर केमिकल से बनाए जाते हैं और इनसे कुछ लोगों को ऐलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं। एलर्जी से त्वचा, आंखों, नाक और गले में जलन हो सकती है। इनसे संवेदनशील लोगों में सर्दी, खांसी और सांस की तकलीफें भी हो सकती हैं। इनसे दमा और अन्य जटिल समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।

त्वचा की समस्याएं

होली के रंगों में संभावित हानिकारक केमिकल्स से त्वचा की समस्याएं होने से स्वास्थ्य को बहुत बड़ा खतरा होता है। इनसे खुजली, लालिमा, सूखापन, स्केलिंग, जलन का एहसास और फुंसियां हो सकती हैं। होली के रंगों का प्रभाव बालों पर भी पड़ सकता है। कई लोगों को होली के बाद बालों का झड़ना, सिर की त्वचा पर खुजली, गंजापन, बालों का बेजान और रूखा होने जैसी समस्याओं का सामान करना पड़ता है।

आंखों की समस्याएं

होली के जश्न के बाद लोगों में पाई जाने वाली आम समस्याएं आंखों से जुड़ी होती हैं, जिनमें जलन, खुजली, आंखों में अधिक पानी आना, रोशनी के प्रति अधिक संवेदनशीलता, आंखों में दर्द या लाल होने के लक्षण शामिल होते हैं।

पाचन संबंधी समस्याएं

होली के उल्लास में रंग लगे हाथों से पकवान खाने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। रंग म्यूकस मेम्ब्रेन (श्लेष्म झिल्ली) में जलन पैदा कर सकते हैं, जिस कारण आपको मिचली, उल्टी या पेट की तकलीफ हो सकती है, साथ ही इंफेक्शन होने की संभावना भी बनी रहती है।

केमिकल का उपयोग

होली के रंगों में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायनों से आपके स्वास्थ्य के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इससे पक्षाघात (पैरालिसिस), गुर्दे की खराबी और त्वचा के कैंसर जैसी समस्याएं जुड़ी हैं इसलिए सावधान रहें। आजकल हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) रंग बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन इन पर भी कोई नियमन नहीं है, इसलिए आपको भ्रामक लेबल से सावधान रहने की जरूरत है। नकली ऑर्गेनिक या झूठा दावा करने वाले उत्पादों से सावधान रहें, सुरक्षित रंगों को पहचानने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं—


  • रंगों से यदि केमिकल या पेट्रोल की गंध आए तो उन्हें न खरीदें। यदि रंग पानी में घुलता नहीं है तो उनमें केमिकल हो सकता है, बेहतर होगा उन्हें न खरीदें।
  • ऑर्गेनिक रंगों में चमकदार कण नहीं होते हैं और वे गहरे रंगों (डार्क शेड) में उपलब्ध नहीं होते हैं। इसलिए सिल्वर, गहरा पर्पल या काला रंग न खरीदें, हो सकता है कि वे प्राकृतिक रंग न हों।
  • बेसन में हल्दी मिलाएं और चमकदार पीला रंग पाएं। आप पानी में गेंदे के फूलों के पत्तों को उबालकर पीले रंग का पानी बना सकते हैं। लाल रंग बनाने के लिए गुड़हल के फूलों के सूखे पत्तों के पाउडर को आटे के साथ मिला लें। बीटरूट के टुकड़े काटकर या अनार के दाने पानी में मिलाकर मनमोहक गुलाबी रंग का पानी बना सकते हैं। पानी में केसर भिगोकर या अच्छी क्वालिटी की प्राकृतिक हिना या मेहंदी मिलाकर नारंगी रंग का पानी बना सकते हैं।

सुरक्षित होली के लिए अपनाएं ये टिप्स

  • होली में रंगों से खेलने से पहले मॉइचराइजिंग लोशन, जैतून (ऑलिव) या नारियल का तेल त्वचा पर लगा लें। इससे आपकी त्वचा सुरक्षित भी रहती है और बाद में रंग छुड़ाना भी आसान हो जाता है। आप एक वॉटरप्रूफ सनस्क्रीन लोशन का भी प्रयोग कर सकते हैं। यदि आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं तो होली खेलने से पहले उन्हें निकालकर कर रख दें।
  • होली के रंगों से आपके बाल और सिर की त्वचा खराब हो सकती है, इसलिए रंगों से खेलने से पहले आप सिर और बालों में तेल लगा सकते हैं या कैप (टोपी) पहनकर उन्हें सुरक्षित रख सकते हैं। केवल जैविक (ऑर्गेनिक) तरीके से बनाए रंगों का ही प्रयोग करें, सबसे अच्छे हैं प्राकृतिक सामग्रियों से बने रंग।
  • होली मनाने के बाद अपने आपको साधारण पानी और साबुन से साफ करें। कठोर साबुन, डिटर्जेंट या अन्य केमिकल का उपयोग करने से बचें, इनसे भी त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। चेहरे की चमक दोबारा पाने के लिए शहद के साथ नींबू का रस मिलाकर प्रयोग करें या बेसन, हल्दी और दही का एक प्राकृतिक फेस पैक बनाकर लगाएं।
  • आंखों में रंग चले गए हों तो उन्हें ठंडे पानी से धो लें। चमकदार, स्वस्थ बालों को दोबारा पाने के लिए सिर पर अंडे की जर्दी या दही मलकर धो सकते हैं।

कैंसर और डायबिटीज जैसे बड़े रोगों को खत्म करता है नींबू, जानें कैसे?


नींबू भले ही स्‍वाद में खट्टा हो लेकिन इसके फायदे बहुत ही मींठे है। नींबू और नींबू का रस स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से बहुत फायदेमंद होता है। त्‍वचा को निखारने के लिए नींबू एक प्राकृतिक ब्‍लीच की तरह है। इसके छिलके का प्रयोग मृत त्‍वचा को हटाने, ब्‍लैकहेड को साफ करने के लिये प्रयोग कर सकते हैं। यह बालों से डैंड्रफ भी हटाता है। नींबू का रस विटमिन सी, विटमिन बी, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से समृद्ध होता है। ऐसी बहुत सी बीमारियां हैं, जो इसके नियमित सेवन से दूर रहती हैं। आज हम आपको नींबू के फायदे बता रहे हैं।

एंटी ऑक्सीडेंट का है सीधा स्त्रोत

नींबू में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाते हैं। बैक्टीरिया और वायरस की वजह से फैलने वाली बीमारियों से बचाव के लिए नींबू के रस का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा नींबू सिट्रस परिवार के अंतर्गत आता है। पीले रंग के इस फल में मौजूद विटामिन सी, एंटीऑक्‍सीडेंट का शक्तिशाली स्रोत है। नींबू एंटीऑक्‍सीडेंट का एक समृद्ध स्रोत है। नींबू में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट आपके स्‍वास्‍थ्‍य, बालों और त्‍वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है।


इन बीमारियों से बचाता है नींबू


  • नींबू में पोटेशियम और फॉस्फोरस जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो ब्रेन सेल्स और नर्वस सिस्टम को मज़बूती देते हैं।
  • इसमें मौज़ूद विटमिन सी एंटी ऑक्सीडेंट तत्वों के साथ मिलकर कैंसर जैसी ख़्ातरनाक बीमारी से लडऩे में मदद करता है।
  • यह आयरन का अच्छा स्त्रोत होने से शरीर में आयरन अब्ज़ॉप्र्शन भी बढ़ाता है। इसलिए यह रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाने में भी मददगार साबित होता है।
  • नींबू का रस पानी में मिलाकर गरारा करने से गला खुल जाता है। खांसी-ज़ुकाम जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए नींबू का सेवन करना चाहिए।
  • एक गिलास गर्म पानी में नींबू डाल कर पीने से पाचन क्रिया ठीक रहती है।
  • यदि मसूढ़ों से खून रिसता हो तो प्रभावित जगह पर नींबू का रस लगाने से मसूढ़े स्वस्थ हो जाते हैं।
  • पेट खराब, कब्ज, दस्त होने पर नींबू का रस पीने से राहत मिलती है। नींबू का रस रक्तचाप को भी संतुलित रखता है।
  • अत्यधिक थकान महसूस होने पर एक गिलास पानी में नींबू निचोड़कर पिएं। इससे एनर्जी मिलेगी और बॉडी की फिटनेस भी बनी रहेगी।
  • नींबू पानी पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है, जिससे घाव जल्दी ठीक होते हैं।
  • नींबू को अपनी डाइट में शामिल करने से त्वचा की रंगत में निखार आता है। नींबू का छिलका कोहनी पर रगडऩे से कोहनी का कालापन दूर होता है।
  • नींबू का सेवन करने से आंखें स्वस्थ रहती हैं। आंखों की अच्छी रोशनी के लिए नींबू के रस का प्रतिदिन सेवन करना चाहिए।
  • नींबू को अपनी रोज़ाना डाइट मेें शामिल करने से आप रख सकते हैं अपनी और अपने परिवार की सेहत का खास ख्याल। रोजाना एक से दो गिलास नींबू पानी का सेवन करना चाहिए। खाने के समय सलाद में नींबू डाल कर भी उसका सेवन किया जा सकता है।

इन 4 कारणों से बढ़ रहा है मोटापा, ऐसे पाएं छुटकारा



1. अवसाद

अवसाद कम करने की कई दवायें वजन बढ़ाती हैं। अगर अवसाद दूर करने की दवा ले रहे हैं, तो यह मानकर चलिए कि आपका वजन पांच पाउण्‍ड (करीब 2.5 किलो) से 15 पाउण्‍ड (करीब सात किलो) तक बढ़ेगा। अगर आप अवसाद कम करने की दवा नहीं ले रहे हैं, तो भी अवसाद आपको मोटा बना सकता है। अमेरिकी जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्‍थ में प्रकाशित स्‍टडी में कहा गया था कि उदास और तन्‍हा रहने वाले लोगों का वजन अन्‍य लोगों के मुकाबले तेजी से बढ़ता है। अवसादग्रस्‍त व्‍यक्ति उच्‍च कैलोरी फूड का अधिक सेवन करते हैं और साथ ही व्‍यायाम के प्रति भी उनमें अरुचि देखी जाती है।

कैसे सुधारें

डॉक्‍टर की सहायता से धीरे-धीरे दवाओं पर निर्भरता कम करें। व्‍यायाम के लिए समय निकालने से आपको फायदा होगा। दोस्‍तों के साथ व्‍यायाम करने से तनाव दूर करने में मदद मिलेगी।

2. पाचन संबंधी परेशानी

पाचन संबंधी बीमारियों से भी वजन बढ़ता है। यदि आपको आंत संबंधी कोई रोग है तो वजन बढ़ने की आशंका अधिक होती है। सामान्‍य तौर पर भोजन के एक घंटे या उसके बाद आंत में क्रिया शुरू होती है। लेकिन, दिन में एक दो बार यह क्रिया हो, तब भी ठीक है। पाचन में परेशानी की वजह कम पानी पीना, पोषक तत्‍वों की कमी अथवा कोई दवा हो सकती है।

कैसे सुधारें

अगर आपको केवल कब्‍ज की परेशानी है तो आप ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिनमें प्रोबॉयोटिक्‍स की मात्रा अधिक हो। पानी पर्याप्‍त मात्रा में पियें। फाइबर युक्‍त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।


3. कहीं पोषण की तो कमी नहीं

विटामिन डी, मैग्‍नीशियम अथवा आयरन की कमी से इम्‍यून सिस्‍टम और मेटाबॉलिज्‍म कमजोर होता है। इसके चलते स्‍वस्‍थ जीवनशैली अपनाना मुश्किल हो जाता है। आप 'लो एनर्जी फूड', मिठाई और सामान्‍य कार्बोहाइड्रेट के प्रति अधिक आकर्षित हो सकते हैं। इसके साथ ही आप व्‍यायाम से जी चुराने लगते हैं और खुद को थका हुआ महसूस करते हैं। यह स्थिति आपका वजन बढ़ा सकती है।

कैसे सुधारें

रेड मीट, पालक और बादाम आदि का सेवन करें। विटामिन डी की कमी को पूरा करने करने के लिए जितना दूध पीना चाहिए, उतना एक दिन में पीना आसान नहीं है। साथ ही इतनी देर सूर्य की रोशनी में रह पाना भी आपकी त्‍वचा के लिए अच्‍छा नहीं है। यहां यह समझने की जरूरत है कि सही मात्रा में विटामिन डी हासिल करने में समय लगता है। विटामिन डी की अधिक मात्रा किडनी में पथरी का कारण भी बन सकती है।

5. आपको कुशिंग सिंड्रोम है!

अधिक वजन से रक्‍तचाप, ऑस्टियोपोरोसिस और त्‍वचा संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। त्‍वचा पर स्‍क्रेच मार्क्‍स भी पड़ सकते हैं। पेट की निचली मांसपेशियों पर जामुनी अथवा सिल्‍वर स्‍क्रेच मार्क्‍स पड़ने का अर्थ है कि आपका शरीर प्राप्‍त पोषक तत्‍वों को सही प्रकार से इस्‍तेमाल नहीं कर पा रहा है। यह कोरटिसोल-प्रोड्यूसिंग ट्यूमर के कारण होता है। हालांकि यह सिंड्रोम दस लाख में केवल 15 व्‍यक्तियों में ही होता है।

कैसे सुधारें 

अगर आपका आहार, व्‍यवहार और दवायें, सब कुछ ठीक होने के बाद भी वजन कम नहीं हो रहा तो आप एक मेडिकल टेस्‍ट करा सकते हैं। इससे आपके शरीर का कोरटिसोल स्‍तर पता चल जाएगा और आपको वजन काबू में रखने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे होने वाली अन्‍य बीमारियों के खतरे के बारे में भी पता चल सकता है।

ज़्यादा ड्रिंकिंग की लत से कैसे निजात पाएं



ज़्यादा ड्रिंकिंग करना जानलेवा हो सकता है क्‍योंकि यह आपके अंगों को अंदर से ख़राब कर देती है। आइए इस विडियो में सीनियर साइकोलॉजिस्‍ट डॉक्‍टर मधुमती सिंह से जानें कि ड्रिंकिंग की लत से आप कैसे निजात पा सकते हैं। डॉक्‍टर मधुमती का कहना है कि शाम का टाइम जब आप ड्रिंक करते हो, उसे समय अपना ध्‍यान किसी ओर एक्टिविटी में लगाएं। यानि ड्रिंक की जगह आप कोई हॉबी या स्‍पोर्ट्स शुरु करें। दूसरी चीज कुछ ऐसे नए दोस्‍त बनाएं जो ड्रिंक न करते हो। अपना सोशल सर्कल चेंज करने की कोशिश करो। तीसरा आध्‍यात्मिक चीजों के बारे में पढ़ें और कुछ लिखना शुरू करें। लिखने से आपके अंदर मौजूद निराशा बाहर आ जायेगी। पार्टियों में जाकर एल्‍कोहल की जगह मॉकटेल पिएं। आप कोशिश करेंगे तो कोई भी चीज असंभव नहीं है।

शराब छोड़ने के लिए कुछ टिप्स:-

मुद्रा ध्यान व् योगाभ्यास करें:-


शराब का सेवन करने से इंसान का आत्मविश्वास बहुत कमजोर हो जाता है, जिसके कारण शराब का जहर धीरे धीरे आपके शरीर में फैलने लगता है, तो इससे निजात पाने के लिए ध्यान करना और योगा करना एक सरलव उत्तम उपाय है, इसके कारण आपके शरीर में विकार को दूर करने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपका आत्मविश्वास मजबूत होता है, और आपको शराब छोड़ने में मदद मिलती है, और यदि आप अपने आत्मविश्वास को मजबूत करके ये सोचें की आप शराब को छोड़ देंगे तो आप ऐसा कर सकते है।

कुंजल क्रिया करें:-

नमक मिलें गुनगुने पानी को भरपेट पीएं, और उसके बाद उलटी करने की कोशिश करें, और जब उलटी आएं तो इसके कारण आपके शरीर का शुद्दीकरण हो जाता है, और आपको शराब पीने का मन नहीं करता है।

घरेलू व्यव्हार से करें शुरुआत:-

इस बात की शुरुआत आपके घर से ही हो सकती है, जब भी आपको लगे की आपके पति शराब पीने वाले है तो शुरुआत में ही उनका विरोध करना चाहिए, ताकि वही से रुकने की शुरुआत हो जाएँ ,और ऐसा भी नहीं है, की लड़ाई करें, परंतु उन्हें आराम से रोकने की कोशिश करें, और इससे होने वाले नुकसान के बारे में बताएं वो आपकी बार जरूर समझेंगे।

डॉक्टर से सलाह लें:-

कई लोग शराब की लत को एक दम से छोड़ने की कोशिश करते है, परंतु कई बार इसे अचानक से छोडने के कारण आपके शरीर को नुकसान भी हो सकता है, इसीलिए आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की डॉक्टर आपके लिए किसी दोस्त से कम नहीं होता है, तो आपको शराब को छोड़ने के लिए एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

कॉउंसलर की मदद लें:-

शराब की लत को छोड़ने के लिए आप कॉउंसलर की मदद भी ले सकते है, क्योंकि वो आपको एक अच्छी राय दें सकता है, जिसके कारण आपको शराब को छोड़ने में मदद मिलती है, और इसके लिए आप किसी हॉस्पिटल या अपने दोस्तों की राय भी ले सकते है, और आप किसी संस्था में भी इस समस्या का समाधान कर सकते है, इसीलिए यदि आपके पति भी शराब पीते है तो आप भी किसी कॉउंसलर की मदद से या किसी संस्था से काम लेकर अपनी इस समस्या का समाधान कर सकते है।

10 मिनट में थकान और कमजोरी को दूर करते हैं ये योगासन


योग तनाव कम करने से लेकर बीमारियों को कंट्रोल करने और वजन घटाने से लेकर तुरंत ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है। योग की कुछ सरल मुद्राएं तुरंत एनर्जी देने में मदद करती हैं।

एनर्जी के लिए योग

योग एक आध्यात्मिक प्रकिया है जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम होता है। योग के जरिए आपके शरीर और मस्तिष्‍क का मिलन होता है। योग तनाव कम करने से लेकर बीमारियों को कंट्रोल करने और वजन घटाने से लेकर तुरंत ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है। योग की सरल मुद्राएं आपको व्‍यायाम के तनाव से बचने और तुरंत एनर्जी देने में मदद करती हैं। योग आपको अपने किसी भी काम में सफलता हासिल करने में मदद करता है क्‍योंकि इसके आप आसानी से अपने विचारों पर ध्‍यान लगा सकते हैं।

बालासन

बालासन को करने से तनाव कम होता है और तुरंत एनर्जी मिलती है। इस योग को करने के लिए घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं और शरीर का सारा भाग एड़ियों पर डाल दें। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें। ध्‍यान रखें कि आपका सीना जांघों को छूना चाहिए, अब अपने माथे से फर्श को छूने की कोशिश करें। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहें और वापस उसी अवस्था में आ जाएं।

भुजंगासन

भुजंगासन को कोबरा आसन भी कहते हैं। इसे करने के लिए जमीन पर उलटा लेट जाएं। पैर और हिप्स को समान रूप से फैलाकर रखें। हथेलियों को जमीन पर कंधों के सामने रखें। अब शरीर के बाकी हिस्से को बिना हिलाए-डुलाए चेहरे को बिल्कुल ऊपर की ओर करें। कुछ समय के लिए इस मुद्रा को यूं ही रखें। इस आसन को करने से आप तुरंत ही एनर्जी पा सकते हैं।

ताड़ासन

अगर आप बहुत कमजोर महसूस करते हैं तो ताड़ासन आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। इसको करने से तुरंत एनर्जी पाने में मदद मिलती है। इसे करने के लिए जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों पर अपने शरीर का वजन सामान रखें। इसके बाद दोनों हथेलियों की अंगुलियों को मिलाकर सिर के ऊपर ले जाएं। हथेलियों सीधी रखें फिर सांस भरते हुए अपने हाथों को ऊपर की ओर खींचिए,। इसके साथ ही पैरों की एड़ी को भी ऊपर उठाएं और पैरों की अंगुलियों पर शरीर का संतुलन बनाए रखिए।

वक्रासन

कमर की चर्बी दूर करने के साथ-साथ वक्रासन तुरंत एनर्जी भी देता है। इसे करने के लिए दंडासन की स्थिति में बैठ जाएं। अब दायें पैर को मोड़कर बायीं जांघ के पास घुटने से सटाकर रखें, ध्‍यान रहें कि आपका बायां पैर सीधा रहें। बाएं हाथ को दाएं पैर एवं पेट को बीच से लाकर दाएं पैर के पंजे के पास टिकाएं। दाएं हाथ को कमर के पीछे भूमि पर सीधा रखें। गर्दन को घुमाकर दायीं और मोड़कर देखें लेकिन बाएं पैर, कमर और दाएं हाथ सीधे रहेंगे।

परिव्रता त्रिकोणासन

परिव्रता त्रिकोणासन पाचन शक्ति को दुरुस्‍त रखने के साथ-साथ तुरंत एनर्जी भी देता है। इसे करने के लिए सीधा तनकर खड़े हो जाएं और बाएं पैर को बायीं ओर और दायें पैर को दायीं ओर घुमाएं। दाएं घुटने को दायें टखने के ऊपर मोड़ें। बांहों को कंधों की ऊंचाई में ले जाएं और हथेलियों को जमीन में ही रखें। अब सांस छोड़ते हुए हिप्‍स को आगे की ओर झुकाएं। बायीं हथेली से दाएं पैर को छुये और दायीं ओर मुड़कर दायें हाथ को छत की दिशा में ले जाइये। और सिर को दायीं ओर घुमाकर दायें हाथ की उंगलियों की ओर देखिए। और  करने से तनाव कम होता है और तुरंत एनर्जी मिलती है