हार्ट अटैक के आने का पता अब आपको पहले चल जाएगा क्यू की ये काम करने वाला है एक मोबाइल एप. शोधकर्ताओं ने एक ऐसा मोबाइल एप विकसित किया है जो हृदयाघात के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार आलिंद फिब्रिलेशन की पहचान कर सकेगा. फिनलैंड में टुर्कू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जुहानी ऐराक्सिनेन ने कहा, “पहली बार सामान्य उपकरण ऐसे नतीजे पर पहुंच पाया है, जिससे वह मरीज के इलाज में सहायता प्रदान कर सके”. शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस एप को कुछ समय तक और विकसित किया जाएगा.
| More:Link Between Aspirin and Heart Disease |
हृदय गति का बहुत तेज गति से धड़कने की क्रिया को आलिंद फिब्रिलेशन कहते हैं, जिससे हृदय का काम बंद करना और हृदय संबंधित समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में हार्ट अटैक को रोकने के लिए समय पर इसकी पहचान होना बहुत जरूरी है. रुक-रुक कर आलिंद फिब्रिलेशन होने के कारण वर्षो से डॉक्टरों को भी इसका पता नहीं चलता था, जिस कारण यह खोज और भी ज़रूरी है.
300 मरीजों पर की रिसर्च
इस शोध के दौरान 300 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें लगभग आधे लोग आलिंद फिब्रिलेशन से पीड़ित थे.शोधकर्ता मोबाइल एप की सहायता से रोग की पहचान करने में कामयाब रहे. शोधकर्ताओं के अनुसार इससे लगभग 96 फीसदी तक सही परिणाम मिले.
कैंसर के मरीजों में खुदकुशी का खतरा 5 गुना ज़्यादा रहता है.
प्रोस्टेट, मूत्राशय और गुर्दा के कैंसर के मरीजों में खुदकुशी करने का खतरा पांच गुना अधिक होता है. भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक सहित अनुसंधानकर्ताओं के एक नए सर्वेक्षण में इस बात माना गया है. उन्होंने अपने सर्वेक्षण में साथ ही यह दिखाया है कि कैंसर के मरीजों के आत्महत्या करने की आशंका आम लोगों से तीन गुना अधिक होती है. कैंसर का पता चलने और उसके उपचार के दौरान गंभीर मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारण है. कैंसर के पांच से 25 प्रतिशत मरीज अवसाद के शिकार हो जाते हैं और कई अन्य मरीज पोस्ट- ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर( पीटीएसडी) से प्रभावित हो जाते हैं.

No comments:
Post a Comment